14
Dec
09

कहानी दो कुक्कुर की

भाई जो भी कहो ज्युरिख्पुर और ज्युरिख्पुर के कुक्कुर का हमारा कुछ तो नाता है | जहां public place में बच्चों और कुत्तों की आवाज नहीं सुनाई देती वहाँ एक ही हफ्ते में दो मजेदार वाकये हो गए | पहले तो एक सवा किलो के कुत्ते ने हमपे भौंका | कुत्ता भी ऐसा पिद्दी सा की छींके तो खुद को दस्त लग जाये | हमारी जर्मन कक्षा जर्मन लोगों से बात करना तो सिखा रही है पर कुत्तों के बारे में अवगत न कराया | अब हम कुक्कुर महाशय को हिंदी या अंग्रेजी में दुत्कारें और उसे समझ में ही न आये तो क्या फायदा !

खैर दूसरी घटना ये हुई की भरी दुपहरिया बीच बजरिया हमने एक औरत को अपने कुत्ते की गन्दगी उठाते हुए देखा | कुक्कुर महाशय ने तो जहां मन आया कर डाला अब बेचारी मालकिन को साफ़ करना पड़ा, समझ में न आया मालिक कौन है दोनों में | हमें लगा की किये कराये पे पानी फेर देंगी मैडम पर कुक्कुर-मल उठाने के भी special दस्ताने आते हैं | और मैडम भी मेधावी थी, अब इतना बड़ा कुत्ता पाला है तो एक दस्ताने से क्या होगा | अब हम इंडिया टीवी \ आज तक तो हैं नहीं की आपको आँखों देखा और कैमरा कैद विवरण दे दें | पर हाँ ये आश्वासन देते हैं की कैमरा होगा भी तो हम अपने पाठकगण को ऐसी वीभत्स छवियों से त्रस्त न करेंगे


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