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किसका सुर और कैसे मिले?

इस गणतंत्र दिवस पे पता चला की भारतवर्ष का चहेता गाना “मिले सुर मेरा तुम्हारा” दोहराया गया है एक नए ढंग से “फिर मिले सुर मेरा तुम्हारा” (पहला हिस्सा, दूसरा हिस्सा ) | सुन कर अच्छा लगा, नयी सदी के नए दशक में क्यूँ न एकता में सारा समाज (समाज न की राष्ट्र-राज्य अर्थात nation-state) एक नए ढंग से सुर में सुर मिलाये , आखिर हर पीढी हर पौराणिक (mythology) वस्तु को अपने ढंग से दोहराती है और इस ही दोहराने, भूलने और याद रखने से ही ऐसी स्मृतियाँ जीवित रहती हैं | पर यह देख कर तनिक निराशा हुई की ये किसके सुर मिल रहे हैं और कैसे मिल रहे हैं|

जहां की पहले गाने में देश की जानी मानी हस्तियाँ तो थीं पर ऐसा नहीं लग रहा था की सिर्फ वही हैं इस देश में | नए गाने में सिर्फ हस्तियाँ वो भी ज्यादातर फ़िल्मी सितारे दिखाई दे रहे हैं | जहां पिछले गाने में हर प्रांत के , हर भाषा के सुर में वहाँ की मिटटी की खुशबू आती थी वहीं नए गाने में वो बात नज़र नहीं आ रही | और इन सब खुशबुओं का सम्मलेन किस सौंदर्य से होता है वो न सिर्फ दिखाई देता था पर सुनाई भी देता था | हस्तियों से कोई परहेज़ नहीं है लोग उनको जानते, पहचानते और मानते हैं पर उनका कोई स्थान तो होना चाहिए, बहुतों को बिना किसी सन्दर्भ (context) के ठूंस दिया गया है |

मैं कोई महान संगीतग्य तो नहीं की दोनों गानों के सुर लय और ताल की व्याख्या करूं और critical remarks दूं पर इतना ज़रूर लगता है जब पुराना गाना तेज पकड़ता है तो मन हर्षोल्लास से भर जाता है | जहां पुराने का आग़ाज़ पंडित भीम सेन जोशी से होता है वहीं अमिताभ बच्चन की आवाज़ मुझे तो न भाई, दीपिका पदुकोण वाला हिस्सा तनिक भी न भाता | शास्त्रीय संगीत तो अच्छा चुना है पर लोक संगीत में वो मिठास नहीं आती | कुछ कुछ हिस्से तो बहुत बेकार लगे जैसे श्यामक डावर, शाहिद कपूर और रणबीर कपूर के | शंकर एहसान और लॉय के सुरों में गिटार बहुत अजीब सा लगता है | पंजाब के सुर में तो पुराने गाने का कोई जवाब नहीं है |

ऐसे विश्लेषण का कोई अंत नहीं है पर कुल मिलाकर देखा जाये तो लगता है सुर तो हैं, थोड़े अछे, थोड़े कम अछे पर उनका मिलन कुछ ख़ास न हुआ, समागम कम और कलह ज्यादा | वो अंग्रेजी में कहते हैं न – sum is more than its parts वो आभास न हुआ


7 Responses to “किसका सुर और कैसे मिले?”


  1. 1 divesh
    2010/01/26 at 5:07 pm

    very very well said 🙂

  2. 2010/01/26 at 5:16 pm

    @दिवेश : इस बात से तो दुःख हुआ ही की दीपिका, शाहिद और रणबीर जैसे कलाकार जो अभी फिल्म जगत में कोई खासा नाम न बना पाए हैं उनको जबरदस्ती ठूंसा, पर यह देख कर भी अचम्भा हुआ की भूपेन हजारिका श्रेया घोषाल और सोनू निगम जैसे talent को यूं ही गँवा दिया गया| और बनियान धारी सलमान खान को थोड़ी सी भी शर्म नहीं है, इस गाने में इतना महान हिस्सा था मूक बच्चों को खुद को express करता दिखने में उसकी भी मटिया पलीद कर दी |

  3. 2010/01/28 at 6:30 pm

    Meri mann ki baat kah di. Waah. Puraane gaane mein lag raha tha, hum aur aap jaise log gaa rahe hain. yahaan lagta hai ki hamaari awaaz ko nazarandaaz kiya gaya hai.

  4. 2010/01/28 at 6:35 pm

    हाँ निशांत | और ब्लॉग जगत के कई दिग्गजों ने ये भी दिखाया की पूरे विडियो में तमाम technical गलतियाँ हैं कई जगह lip sync नहीं है | यदि फ़िल्मी सितारों को ही लेना है तो दिग्गजों को छोड़ दिया गया और युवकों में भी दीपिका और रणबीर जैसों को लिया जिन्होंने ने कोई खासा नाम establish नहीं किया है |

  5. 2010/01/28 at 6:52 pm

    Mein aap se puri sahmati rakhta hun.

    Kintu ek baat:aapne aaj kal news channel aur akhbaroon ka ravayaa dekha… kya aapko lagta hai ki woh hamaari awaaz pahuncha rahe hain? Aaj ka Times of India utha lijiye. Iss tarah ka wahiyaat akhbaar kiss liye roj prakashit ho raha hai? Agar aapko iska uttar mil jaye, to aapko iss preashn ka uttar bhi mil jayega, ki iss gaane ko banaane ka karan kya hai, aur isko banaane waalon ka nazariya kya hai..

  6. 2010/01/29 at 7:52 am

    जी यही होता है जब फिल्म के मायने बॉक्स ऑफिस की खनक और टीवी के मायने टी आर पी हो जाता है | मीडिया को चौबीस घंटे दिखाना है तो क्या करे इसको मैंने एक diagram में capture किया है गौर फ़र्माइएग http://s3.amazonaws.com/data.tumblr.com/tumblr_kq9uhoz0Uk1qznrcqo1_1280.jpg?AWSAccessKeyId=0RYTHV9YYQ4W5Q3HQMG2&Expires=1264837519&Signature=EYOP62fTDvtflTaryACEr62pga8%3D

    कैसे दरअसल मीडिया कुछ ही ढर्रे हैं जिसपे चलती रहती है | इतने सारे मुद्दे ए गए पर इनका व्यवहार एक समान रहा

    पर मीडिया हमारे समाज का आईना तो है | कई हिंदी समाचार चैनलों का तिरस्कार किया जाता है पर हमें ये इस बात का विश्लेषण करना चाहिए की कौन कौन लोग हैं जो ये सब देखते हैं, वो ये सब क्यूँ पसंद करते हैं और क्या इसके अलावा कुछ दिखाया नहीं जा सकता जो सबको मन भावन लगे? सिर्फ TRP और survey में अटके रहेंगे तो ऐसे ही सत्यानाश होगा

  7. 2010/01/30 at 7:25 pm

    very true buddy. it is still very happy moment when u listen to teh previous version. . . .trust me. I’m drunk rite now but yaeah i can still feel. kaise bataoon . .. ill comment latert


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