15
Jun
10

एक किस्सा

तो बचपन का एक किस्सा ऐसे ही याद आ गया, सोचा बाँट लिया जाये | तो किस्सा है एक पंडित जी का, जो रोज कृष्ण भगवान् की मूर्ती पूजा करते थे | वह मूर्ती नहीं एक पत्थर होता है, गोलाकार सा | एक बार पंडित जी को कहीं कई दिनों के लिए जाना पड़ गया तो पूजा अर्चना की जिम्मेदारी उन्होंने अपने चेले को दे दी | अब उस पत्थर की सफाई करते करते हाथ से छूटा और कहीं गुम गया | चेला परेशान की पंडित जी को पता चला तो बहुत नाराज़ होंगे | उसने चुपके से एक जामुन रख दिया भगवान् जी की जगह | चूंकि असली पत्थर देखने में जामुन जैसा ही था तो पंडित जी को पता न चला और वापिस आने के बाद वो तो रोज ठाकुर जी समझ के जामुन की पूजा करते थे |

पर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी. जामुन सड़ गया | पंडित जी ने जब चेले से पूछा की ये कैसे हो गया | तो चेले ने ये कुछ पंक्तियाँ जड़ दीं:

पुनि पुनि चन्दन, पुनि पुनि पानी
ठाकुर जी सड़ गए हम का जानी


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