25
Aug
10

एक कहानी

दरअसल एक छोटी बच्ची को अपनी गर्मी की छुट्टीओं में एक छोटी सी कहानी लिखनी थी, दिए गए एक चित्र पे | एक बाज़ार का नज़ारा था, एक लड़के की साइकल टमाटर के ढेर से भिड़ी हुई दिखती है – या शायद ऐसा ही कुछ | तो हमने एक मन गणंत, अंड बंड एक कहानी जड़ दी | बेचारी बच्ची की मैडम को तो कुछ पल्ले पड़ा नहीं , आपको पड़ जाये तो बताइए | वैसे इस लड़के राजू की एक कहानी और भी है पर वो फिर कभी

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राजू एक अच्छा लड़का था | राजू छठी कक्षा में पढता था | राजू को क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था | राजू को अपनी कापी में चित्र बनाना बहुत अच्छा लगता था | राजू को अपनी साइकल चलाना बहुत अच्छा लगता था | राजू को प्रिय बहुत अच्छी लगती थी |

एक दिन राजू की माँ ने उसे २ रुपये दिए साइकल में हवा भराने को | और कुछ और पैसे दिए बाजार से टमाटर खरीदने को | राजू खूब मस्ती में सीटी बजाता हुआ निकल लिया | बीच में उसके कुछ दोस्त मिले जो मैदान में खेल रहे थे | उस दिन राजू ने half century बनायी | स्कूल में प्रिया ने राजू की होम वर्क वाली कापी भी मांगी थी | राजू खुश था |

राजू ने आज तो खूब हवा भरवाई और निकल लिया बाजार की ओर | सोमवारी के बाजार में काफी चहल पहल होती है | कहीं नाइकी की बनियान बिकती है तो कहीं डेनिम का पाउडर, सब १० रुपल्ली में | राजू रंगीनिया देखते हुए जा रहा था की अचानक उसकी साइकल टमाटर वाली के टमाटर के डोंग्चे से भीड़ गयी |

छोटे से धमाके सी आवाज़ ने आस पास वालों को उस तरफ देखने पे मजबूर कर दिया | कुछ नहीं बस साइकल का टायर फटा था | और टमाटर वाली के टमाटर खराब हो गए थे | सारे के सारे पिचक गए थे | टमाटर वाली राजू को खरी खोटी सुनाने लगी | पर राजू का ध्यान तो पिचके हुए टमाटर पे था | फटा हुआ टायर देख के उसको अपनी विज्ञान की कक्षा में पढाया हुआ पाठ याद आ गया – step by step कैसे पता करे की आपकी साइकिल में पंक्चर कहाँ है , वही जिसके द्वारा बच्चों को “scientific method” के बारे में बताया जाता है | पहले आता है अनुभव, फिर उस अनुभव पे करना चाहिए अनुमान, अनुमान के अनुसार परिणाम की भविष्यवाणी करनी चाहिए और उसके बाद …

पर ये क्या ! टमाटर के उस सुर्ख बेजान गूदे में एक हलचल हो रही थी | टमाटर वाली राजू का कन्धा झंझोढ़ रही थी पर राजू को टमाटर के गूदे में बुलबुले बनते नज़र आ रहे थे | राजू को ये भी नहीं समझ में आ रहा था की और लोगों को वही क्यूँ नहीं दिख रहा जो उसे दिख रहा है | वो चीखना चाह रहा था पर मूंह से कुछ न फूटा | दो अजीब सी आँखें, शायद एक नाक और गौर से देखो तो होठ भी बन गया |

“विष्णुपुरी में हुई एक अजीब घटना”, “पूरा का पूरा बाजार पाया गया एक दम खाली”, “चीज़ें वैसी की वैसी पर आदमी कोई नहीं”, “एक पागल लड़का बरामद हुआ विष्णुपुरी के सोमवारी बाजार में”, “लड़के के मूंह पर पास एक वाक्य – जादू का चचेरा भाई


3 Responses to “एक कहानी”


  1. 2010/08/27 at 12:23 pm

    apne to kuch palle nahi pada bhai

  2. 3 VM
    2010/08/28 at 10:35 am

    waah kya kahani hai…naa sir na peir….
    waise isse pad ke darna mana hai ki apple waali story yaad aati hai


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