Posts Tagged ‘anecdotes

30
Jul
10

एक लतीफा ग़ालिबाना

मिर्ज़ा साहब जितने अछे शायर थे उतने ही विनोद प्रीय भी | ऐसे तमाम किस्से हैं जो उनके मजाकिया व्यवहार को दर्शाते हैं | उनमे से एक याद आ रहा है | अब वो कितना सच है ये याद नहीं , मैंने बचपन में शायद किसी किताब में पढ़ा था और ढूँढने पे internet में कुछ मिल नहीं रहा | तो सुनिए …

ये तो आप सब जानते हैं की मिर्ज़ा साहब का काफी जीवन गरीबी, उधारी, लाचारी में बीता | जब कभी थोड़े बहुत पैसों का इंतज़ाम होता तो वो जूंऐ और शराब में उड़ा देते | तो एक दिन एक साहब मिर्ज़ा ग़ालिब के पास पहुंचे और गलती से उनसे कुछ पैसे उधार मांगे | चाचा ग़ालिब तुरंत बोले :

दिरम-ओ-दाम अपने पास कहाँ
खुद चील के घोसले में मांस कहाँ

11
Feb
10

self phulphiling dream

तो आपने सपने तो बहुत देखे होंगे| छोटे सपने, बड़े सपने, नौकरी के सपने, छोकरी के सपने, पढाई के सपने, लढाई के सपने| उन सपनो में से बहुत बहुत साकार भी हुए होंगे | पर क्या आपने कोई सपना ऐसा देखा जो तुरंत साकार हो गया हो | 2 minute Maggi की तरह | जी हाँ Martin Luther Kind की तरह, “I had a dream”. और dream भी self fulfilling prophecy की तरह | self phulphiling dream, खुद ब खुद साकार हो गया | नहीं कोई जंग, विश्व शान्ति, कतरीना, माधुरी वगैरह जैसे महान सपने नहीं, बस एक छोटा सा अदना, सा सपना |

हम ज्यूरिख की tram में बैठे थे तो एक ad देखा “Zurich Schlaflos”, जिसमे एक हाथ मुठ्ठी बांधे उठा हुआ था | अबे हमें जर्मन शब्द schlaf का मतलब तो पता था की नींद होता है पर पूरे शब्द schlaflos का मतलब पता नहीं था | कुछ रातों बाद वही तस्वीर बार बार अध् जगे सपने में आये जा रहे थी, पता नहीं क्यूँ बार बार इस शब्द का अर्थ दिमाग में खटके जा रहा था तो हिम्मत करके नींद से उठ ही गए | पास पड़े लपूझन्ना (माने laptop) पे google translate खोला और schlaflos का मतलब देखा तो धत्त तेरे की हो गयी, मतलब निकला – स्लीपलेस | बस फिर क्या नींद थोड़े न आनी थी …

06
Feb
10

दास्ताँ “जो” और “गन्ना” की

Based on true experiences. People who know me from 2001-05 should be able to relate with this story, including the characters in the story. People who don’t know me and can’t relate it may ignore this as a rambling hand on a keyboard.

दूर गाँव एक बस्ती थी जहां technology बहुत ही सस्ती थी | ये बात है साधूनगर नामक एक गाँव की जहां एक अनाथालय स्थापित किया गया | जिस मारवाड़ी सेठ के नाम पे अनाथालय बनाया गया लोग उसके गुण गान करते और ढेर सारी technology पड़ा करते थे | शुरुआत के पांच भगवानों से तो अब कई भगवान् हो चुके थे | सारे भगवान् मिल कर नहीं तो आपस में अपने देवत्व में चूर होकर बच्चों को ढेर सारा ज्ञान और बहुत सारी technology देते थे | और बच्चे भी मन के सच्चे, खूब जोर लगा के नहीं पड़ते थे , पास में bioscope वाले भैय्या के यहाँ दिन गुजारते और एक छोटे से डब्बे में धमा चौकड़ी करते | काम देव के ऐसे कृपा बाण चले और सूखी सेहरा में कहीं से सोमरस का ऐसा झरना फूटा की पूरा आलम मद में सराबोर हो मादक हो चला | यूं समझिये की हर दिन vallentine और हर रात Ballentine | चचा ग़ालिब तो गलत थे जो कहते “इश्क ने ‘ग़ालिब’निकम्मा कर दिया,वरना हम भी आदमी थे काम के” | अजी ख़ाक डालिए ग़ालिब को यहाँ तो उलटी कहावत हो गयी “इश्क ने कर दिया कामगार ‘कायल’, जब आशिक ने लगा दिया काम पे” | प्रेमी युगल मिलके और जुलके दिन रात पड़ी करते और अव्वल दर्जे से पास होते |

तो उन कई भगवानों में से एक थे जिनका नाम था “नंग धडंग जोकर”, हम इस किस्से में उसे “जो” पुकारेंगे | तो ये है जोकर, मतलब “जो” का एक वाक्या श्रीमान गन्ना के साथ | गन्ना तो अराजकता का प्रतीक था और “जो” तो control freak था | जो खाने और न पीने का भगवान् था और जनता खाने से त्रस्त थी | पराठे तो बगल के चार रास्ता के हवालदार से भी कड़क , मानो खाने के लिए नहीं Judo Karate की practice के लिए बनाये गए हैं | जो आंकड़े लड़ाने में उस्ताद था, जब पैदा हुआ था तब nurse ने ये थोड़े बोला था की लड़का पैदा हुआ है, nurse ने उस ही समय घोषित कर दिया की चलता फिरता कंप्यूटर पैदा हुआ है | खैर जब श्रीमान गन्ना पहुंचे शिकायत करने तो जो ने भारी भरकम शब्दों की एक लड़ी लगा दी | और जब पत्थर नुमा पराठे दिखाए गए तो थोडा दंग तो हुआ पर लड़ी रुकी नहीं |

गन्ना ने बीच में कुछ बोला तो जो ने उसे झड़प दिया | जब जो ने पेट भर के अल्फाजों की उलटी कर ली तो फिर चैन की सांस लेते हुए गन्ना को बोलने को बोला | पर गन्ना चुप और मना कर दिया | जो बौखला गया और कहा तुम कुछ बोल रहे थे अब बोलते क्यूँ नहीं | गन्ना ने दो टूक सा जवाब दिया – आपको मेरे बोलने पे अधिकार है चुप्पी पे नहीं और वहाँ से चल दिया |

26
Jan
10

नाम में क्या रखा है

अब मियाँ Shakespeare तो कह के टपक गए की “नाम में क्या रखा है“, खैर वो तो चीज़ों की अंदरूनी रूप के बारे में कह रहे थे की उनका नाम से कोई लेना देना नहीं है, किन्तु नामों का कुछ तो महत्त्व है | यदि शोले में डाकू का नाम गब्बर न रख के चम्पक भूमिया रखा जाता तो क्या आप उसके “ताप” से थर्राते ? या मुगैम्बो मुगैम्बो न हो कर यदि घंटाप्रसाद कहलाता तो क्या आप खुश होते?

तो नामों की बात से ही याद आया की बात है उस समय की जब हम पढाई-लिखाई पूरी करके निकले जॉब करने | भाई बबुआ जब बाबू बने तो बाबू लोगों के तौर तरीके भी आने चाहिए | Professional जगत में कैसे उठाना बैठना है ये भी पता होना चाहिए और नए नए लोगों से भी मिलना चाहिए जिसे networking कहते हैं | तो जॉब के शुरुआत के दिनों में सब नए नए रंगरूट (recruit) एक दूसरे से मिलते, तो हम को एक बंगाली बाबूमोशाय मिले | मिले तो मिले और झट से अपना हाथ आगे बड़ा के कड़क आवाज़ में बोले स्वागतम| हमें लगा वाह ये हाई, हल्लो की दुनिया छोड़ के कोई ultra देसी मिला है | हमने भी हाथ आगे बड़ा के हाथ से हाथ मिलाया और कड़क आवाज़ में जड़ दिया स्वागतम |

मज़े की बात हुई की बाबूमोशाय झेंप के बोले “दरअसल मेरा नाम स्वागतम है” | हसी की पटाखे तो खूब छूटे पर कहीं Shakespeare जनाब मिल जाये तो उन्हें स्वागतम से स्वागतम कराया जाये और पूछे क्यूँ चचा नाम में कुछ नहीं रखा?

15
Dec
09

खाओ गगन रहो मगन

हमारे प्रोफेस्सर साहब पड़ा रहे हैं की आने वाले सालों में सब काम रोबोट से होगा | रोबोट और artificial intelligence और भविष्य उससे होने वाले उत्पात का नज़ारा तो हमें श्री आर्नोल्ड शिवाजीनगर सालों पहले बता चुके हैं | यहाँ पर बात चली vacuum cleaner, lawn mower वगैरह से और पहुंची इंसानी शरीर में जगह जगह चिप घुसेड़ने की | ये सब देख के तो हमारे रोंगटे खड़े हो गए |

अब automatic vacuum cleaner रहेगा तो बाई का क्या होगा ! खैर वो सब छोडिये हमारी तो एक ही दरख्वास्त है की automatic नाई मत बनाइएगा | इस भागदौड़ के और मशीनी customer care की दुनिया में कुछ ही जगह तो बची हैं सुकून की, उन्हें बक्श दो |

एक महाशय ने वो कर डाला जिसको सुन के हमें कहना ही पड़ा की “ढाक के तीन पात” | पहले तो उन्होंने अपने ही अन्दर RFID चिप डाल ली फ़िर उससे मन न भरा तो अपनी और अपनी पत्नी की नस में एक और ऐसी चिप लगायी जिससे एक में हरकत होने से दूसरे को पता चले | अरे मियां ये सब के लिए तो हमारे हिन्दी फ़िल्म के हीरो सिर्फ़ इश्क फरमा लेते हैं और गाते हैं “जो हाल दिल का इधर हो रहा है, वो हाल दिल का उधर हो रहा है” और ये महानुभाव electronic और surgery लगा रहे हैं | खैर उनका काम वही जाने हमें तो एक ही जुमला याद आ रहा है “को काहू में मगन तो काहू में मगन

14
Dec
09

कहानी दो कुक्कुर की

भाई जो भी कहो ज्युरिख्पुर और ज्युरिख्पुर के कुक्कुर का हमारा कुछ तो नाता है | जहां public place में बच्चों और कुत्तों की आवाज नहीं सुनाई देती वहाँ एक ही हफ्ते में दो मजेदार वाकये हो गए | पहले तो एक सवा किलो के कुत्ते ने हमपे भौंका | कुत्ता भी ऐसा पिद्दी सा की छींके तो खुद को दस्त लग जाये | हमारी जर्मन कक्षा जर्मन लोगों से बात करना तो सिखा रही है पर कुत्तों के बारे में अवगत न कराया | अब हम कुक्कुर महाशय को हिंदी या अंग्रेजी में दुत्कारें और उसे समझ में ही न आये तो क्या फायदा !

खैर दूसरी घटना ये हुई की भरी दुपहरिया बीच बजरिया हमने एक औरत को अपने कुत्ते की गन्दगी उठाते हुए देखा | कुक्कुर महाशय ने तो जहां मन आया कर डाला अब बेचारी मालकिन को साफ़ करना पड़ा, समझ में न आया मालिक कौन है दोनों में | हमें लगा की किये कराये पे पानी फेर देंगी मैडम पर कुक्कुर-मल उठाने के भी special दस्ताने आते हैं | और मैडम भी मेधावी थी, अब इतना बड़ा कुत्ता पाला है तो एक दस्ताने से क्या होगा | अब हम इंडिया टीवी \ आज तक तो हैं नहीं की आपको आँखों देखा और कैमरा कैद विवरण दे दें | पर हाँ ये आश्वासन देते हैं की कैमरा होगा भी तो हम अपने पाठकगण को ऐसी वीभत्स छवियों से त्रस्त न करेंगे

21
Oct
09

नाटकीय रूपांतरण

बहुत कम ऐसा होता है जब आपके कॉलेज के अनुभव आपको पाठशाला की याद दिलाये | जिस lecture में मैं फिलहाल बैठा हुआ हूँ वो शिक्षिका पड़ा तो रही है innovation के बारे में किन्तु पड़ रही हैं एक पहले से लिखे मूलपाठ द्वारा किसी नाटक के अभिनय माफिक| यह देख कर अपने पुराने रसायन शास्त्र (chemistry) के शिक्षक की याद आ गयी जो एक guide book से पढाया करते थे | बच्चों को पता न चल जाये तो सन सत्तर के किसी अख़बार का cover लगा के आते थे | पर आप तो जानते हैं, बच्चा भगवान् का रूप होता हैं और इतने सारे भगवानों से कहाँ कुछ छुप सकता है, एक चतुर बालक ने सारी किताबे छान मारी और वो किताब खरीद कर क्लास के एक कोने में बैठ जाता| बस फिर क्या शिक्षक महाराज दनादन, line by line किताब से पढाते रहते और लड़का line by line underline करता रहता 😀




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