Posts Tagged ‘sher

13
Aug
10

Hazrat-e-Kalmadi

Daagh Dehelvi was a brilliant Urdu poet just after the Mughal era. He had this anecdotal verse to his credit. When invited to a British party the venue was changed at the last moment he kept sitting there and quoted:

Hazrat-e-Daagh jahaan baithe wahaan baith gaye
Wo koi aur honge teri mehfil se ubharne wale

Well I don’t recall this exact verse or the anecdote and Google has not been much of help either. But you do get to appreciate it. In a different context too. Have a look:

[text is much clearer if you click on the image]

30
Jul
10

एक लतीफा ग़ालिबाना

मिर्ज़ा साहब जितने अछे शायर थे उतने ही विनोद प्रीय भी | ऐसे तमाम किस्से हैं जो उनके मजाकिया व्यवहार को दर्शाते हैं | उनमे से एक याद आ रहा है | अब वो कितना सच है ये याद नहीं , मैंने बचपन में शायद किसी किताब में पढ़ा था और ढूँढने पे internet में कुछ मिल नहीं रहा | तो सुनिए …

ये तो आप सब जानते हैं की मिर्ज़ा साहब का काफी जीवन गरीबी, उधारी, लाचारी में बीता | जब कभी थोड़े बहुत पैसों का इंतज़ाम होता तो वो जूंऐ और शराब में उड़ा देते | तो एक दिन एक साहब मिर्ज़ा ग़ालिब के पास पहुंचे और गलती से उनसे कुछ पैसे उधार मांगे | चाचा ग़ालिब तुरंत बोले :

दिरम-ओ-दाम अपने पास कहाँ
खुद चील के घोसले में मांस कहाँ




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